5 अलग-अलग धर्मों के न्यायाधीशों की सुप्रीम कोर्ट की बेंच करेगी ट्रिपल तलाक पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट के अलग-अलग धर्मों को मानने वाले पांच जजों की अनोखी बेंच गुरुवार से ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करने जा रही है।

काफी संवेदनशील मुद्दे पर दाखिल की गई इस याचिका को समानता की खोज vs जमात उलेमा-ए-हिंद नाम दिया गया है। रोचक बात यह है कि इस केस की सुनवाई करने वाले पांचों जज अलग-अलग समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे एस खेहर सिख समुदाय से हैं तो जस्टिस कुरियन जोसेफ इसाई हैं। आर. एफ नरीमन पारसी हैं तो यूयू दलित हिंदू और अब्दुल नजीर मुस्लिम समुदाय से हैं।

हालांकि कोई भी न्यायाधीश किसी मामले का फैसला अपने धार्मिक मान्यताओं से अलग होकर निरपेक्ष रूप से करता है। सभी न्यायाधीशों को शपथ दिलाई जाती है कि वे भारत के संविधान में सच्ची आस्था रखते हैं और भारत की अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे बिना किसी भय, पक्षपात और दुर्भावना से रहित होकर अपनी योग्यता और ज्ञान से अपने न्यायिक कर्तव्य को निभाएंगे और संविधान और कानून की रक्षा करेंगे।

इस मामले के साथ 6 अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी जिसमें शायरा बानो, आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया सबरी मामले शामिल हैं।

उच्चतम न्यायालय ने हालांकि पहले ही साफ कर दिया है कि वह ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह से मुद्दे पर सुनवाई करेगा, यानी कॉमन सिविल कोड का मामला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच के सामने नहीं है।

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