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किताब में बीजेपी सांसद का दावा: टीम मोदी में अयोग्यों, चापलूसों की भरमार, मंत्री और साथी भी नहीं देते सही सलाह

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में अयोग्य और चापलूसों की भरमार है। स्वामी का दावा है कि पीएम मोदी के सहयोगी मंत्री और सलाहकार भी उन्हें न तो सही सलाह देते हैं और न ही उन्हें सच्चाई से रू-ब-रू कराते हैं। अपनी नई किताब ‘रिसेट: रिगेनिंग इंडियाज इकॉनोमिक लेगेसी’ में स्वामी ने लिखा है, “नरेंद्र मोदी अपने पूर्ववर्ती डॉ. मनमोहन सिंह से ठीक विपरीत हैं। माइक्रो इकॉनोमिक्स से तो ये अनौपचारिक रूप से परिचित हैं पर मैक्रो इकॉनोमिक्स के अंतर-क्षेत्रीय गतिशील पेचीदगियों से वो वाकिफ नहीं हैं। बावजूद इसके उन्होंने कठिन परिश्रम और जनमानस के बीच लोकप्रिय छवि के बलबुते बहुत सुधारात्मक कदम उठाए हैं। वो पैसे के मामले में ईमानदार हैं।”
‘द प्रिंट’ में छपे स्वामी की किताब के उद्धरण के मुताबिक, “शैक्षणिक रूप से आंशिक तौर पर पिछड़े होने की वजह से पीएम मोदी अपने दोस्तों और जड़हीन मंत्रियों पर ज्यादा निर्भर हैं, जो कभी उन्हें अर्थव्यवस्था के मसलों पर न तो सच्चाई बताते हैं और न ही उन्हें मैक्रो इकॉनोमिक्स की सही व्याख्या कर उ…

राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन

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जाने-माने वकील और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में क़ानून मंत्री रहे राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में रविावर सुबह निधन हो गया. जेठमलानी बार काउंसिल के चेयमैन भी रहे थे.
जेठमलानी ने कई हाई प्रोफ़ाइल आपराधिक मुक़दमों को लड़ा था और इस मामले में उनकी काफ़ी प्रतिष्ठा भी रही है. जेठमलानी का जन्म 14 सितंबर, 1923 में हुआ था. 1 17 साल की उम्र में जेठमलानी ने क़ानून की डिग्री ले ली थी. इनका जन्म वर्तमान पाकिस्तान में हुआ था लेकिन विभाजन के वक़्त भारत में आ गए थे. 1959 में ही नानावती केस में जेठमलानी ने अपनी पहचान बना ली थी. इसके बाद से वो क्रिमिनल लॉ प्रैक्टिस के दिग्गज चेहरा बन गए. जेठमलानी के दो बेटे और दो बेटियां हैं. इनमें से महेश जेठमलानी और रानी जेठमलानी भी जाने-माने वकील हैं. 2014 में आम चुनाव से पहले जेठमलानी ने नरेंद्र मोदी को पीएम बनाने का समर्थन किया था. हालांकि मोदी के पीएम बनने के बाद जल्द ही वो ख़िलाफ़ हो गए थे. 2015 में अरुण जेटली ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का मुक़दमा दर्ज किया तो जेठमलानी ने केजरीवाल की पैरवी की थी.

जेठमलानी के हाई-प्रोफ़ाइल केस में इं…

चंद्रयान-2: चाँद की अधूरी यात्रा में भी क्यों है भारत की एक बड़ी जीत

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भारत शनिवार की सुबह इतिहास रचने से दो क़दम दूर रह गया. अगर सब कुछ ठीक रहता तो भारत दुनिया का पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के क़रीब उतरता.
इससे पहले अमरीका, रूस और चीन ने चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैन्डिंग करवाई थी लेकिन दक्षिण ध्रुव पर नहीं. कहा जा रहा है कि दक्षिण ध्रुव पर जाना बहुत जटिल था इसलिए भी भारत का मून मिशन चन्द्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया. चंद्रयान-2 जब चंद्रमा की सतह पर उतरने ही वाला था कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया. प्रधानमंत्री मोदी भी इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए इसरो मुख्यालय बेंगलुरू पहुंचे थे. लेकिन आख़िरी पल में चंद्रयान-2 का 47 दिनों का सफ़र अधूरा रह गया. छोड़िए ट्विटर पोस्ट @isro



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बिहार: कौन कर रहा है सरकारी स्कूलों को बदहाल?

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क्या आपका बच्चा बिहार सरकार के स्कूल में पढ़ता है? क्या आपको पता है कि प्राइवेट स्कूलों की तरह यहां के सरकारी स्कूलों में होमवर्क दिए जाने की कोई परंपरा नहीं है?
क्या आप जानते हैं कि बिहार के ज़्यादातर सरकारी स्कूलों में बिजली का कनेक्शन नहीं है, पंखे नहीं हैं? बच्चे अब भी ज़मीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं? बिहार में 52 बच्चों के लिए एक शिक्षक है जबकि तय मानक के अनुसार 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए. मगर बिहार में कहीं 990 छात्रों को पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक तो कहीं 10 छात्रों के लिए 13 हैं. बिहार सरकार के सभी स्कूल नेतरहाट विद्यालय के मॉडल पर बने सिमुलतला जैसे क्यों नहीं हैं जिसे अच्छी पढ़ाई के कारण टॉपर गढ़ने की मशीन कहा जाना लगे है? अगर इन सवालों के जवाब 'हां' में हैं तो मुमकिन है कि कुछ सवाल आपको यक़ीनन परेशान करते होंगे. जैसे स्कूल ड्रेस, मिडडे मील और छात्रवृति के बीच स्कूल की पढ़ाई कहां गुम होकर रह गई है? वैसे इन दिनों बिहार की स्कूली शिक्षा को लेकर ये अहम सवाल नहीं बल्कि तीन और बातें चल रही हैं. पहली बात 'समान काम के बदले समान वेतन' की मांग कर रहे राज्य के क़रीब …

कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने से चीन पर क्या पड़ेगा असर

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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 ख़त्म करने के भारत सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ वैश्विक समर्थन हासिल करने की क़वायद में शुक्रवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने चीन का दौरा किया था.
कश्मीर पर भारत के इस क़दम का चीन ने भी विरोध किया है. चीन का विरोध विशेष तौर पर लद्दाख क्षेत्र को जम्मू-कश्मीर से हटाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने का है. चीन के दौरे के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री क़ुरैशी ने दावा किया कि चीन ने इस मामले पर पाकिस्तान का पूरा समर्थन किया कि मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाया जाना चाहिए. इसके बाद रविवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले से तय तीन दिवसीय यात्रा पर चीन पहुंचे. सोमवार को चीन ने ज़ोर देकर कहा कि भारत को क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने की ज़रूरत है. कश्मीर को लेकर चीन का समर्थन पाना पाकिस्तान और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. लेकिन अपने भौगोलिक कारणों से चीन अब तक इस मुद्दे पर पाकिस्तान का ही समर्थन करता रहा है. कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपना दावा करते हैं. सच्चाई यह है कि दोनों देश इसके कुछ…