कोरोना वायरस: निज़ामुद्दीन में तबलीग़ी जमात का केंद्र कैसे बना 'हॉटस्पॉट'

दिल्ली का निज़ामुद्दीन कोरोना संक्रमण को लेकर सुर्ख़ियों में आ गया है. वजह है मार्च के महीने में यहां हुआ एक धार्मिक आयोजन.
निज़ामुद्दीन में मुस्लिम संस्था तबलीग़ी जमात का हेडक्वॉर्टर हैं जहां ये आयोजन मार्च महीने में चल रहा था.
इस धार्मिक आयोजन में हज़ारों लोग शामिल हुए थे. देशभर में लागू लॉकडाउन के बावजूद बड़ी संख्या में लोग वहीं रह रहे थे.
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया है कि वहां मौजूद 24 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, बाक़ी लोगों की जांच जारी है.

पूरे इलाक़े को सील कर दिया है...

दिल्ली पुलिस ने इस इलाक़े की घेराबंदी कर दी है. पुलिस का कहना है कि लोग बड़ी तादाद में बिना किसी अनुमति के यहाँ पर इकट्ठा हुए थे.
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "जब हमें पता चला कि इस तरह का आयोजन हुआ है तो फिर हमने इस मामले में लॉकडाउन का उल्लंघन करने के लिए नोटिस जारी किया. कई लोगों को कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल ले जाया गया है और उनका टेस्ट किया जा रहा है."
रविवार देर रात ये सूचना मिलने के बाद कि कई लोग यहां एक साथ रह रहें हैं जिसमें कुछ विदेशी भी हैं, दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारी मेडिकल टीम लेकर यहां पहुँचे.
दिल्ली पुलिस ने पूरे इलाक़े को सील कर दिया है जिसमें तबलीग़ी जमात का मुख्य सेंटर शामिल है. इस केंद्र से सटा हुआ ही निज़ामुद्दीन पुलिस स्टेशन हैं और बगल में ही ख्वाजा निज़ामुद्दीन औलिया की दरगाह भी है.
अधिकारियों का कहना है कि वे लोगों की पहचान करके उन्हें अस्पताल में क्वारंटीन के लिए भेज रहे हैं.

दिल्ली सरकार का पक्ष

ये पूरा मामला इसलिए भी सुर्खियों में आया क्योंकि तेलंगाना सरकार ने माना है कि उनके यहां जिन लोगों की कोरोना की वजह से मौत हुई है उनमें से 6 लोग दिल्ली के निज़ामुद्दीन में धार्मिक आयोजन में शामिल हुए थे.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक दिल्ली सरकार पूरे मामले पर एक बैठक कर रही है.
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक़ तबलीग़ी जमात के हेडक्वाटर में रह रहे 24 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. 700 लोगों को क्वारंटीन में रखा गया है. 335 लोगों को अस्पताल में निगरानी में रखा गया.
दिल्ली सरकार ने पूरे मामले में आयोजकों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करने की सिफ़ारिश भी की है. दिल्ली सरकार का दावा है कि जिस वक़्त ये आयोजन चल रहे थे तब दिल्ली में कई ऐसी धाराएं लागू थी जिसमें 5 से ज्यादा लोग एक जगह इकट्ठा नहीं रह सकते थे.
निज़ामुद्दीन में मौजूद 1500-1700 लोगों में से तकरीबन 1000 लोगों को वहां से निकाल लिया गया था. आगे भी स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी काम पर लगे थे.
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केंद्र सरकार का पक्ष

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने सोमवार को केंद्र सरकार की कोरोना ब्रीफिंग के दौरान बताया कि धार्मिक आयोजन के शामिल लोगों की टेस्टिंग, क्वारंटीन में रखने की सुविधा और बाक़ी जांच सब प्रोटोकॉल के मुताबिक़ ही होगा.
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक़ आयोजकों पर क़ानून के मुताबिक़ कार्रवाई की जाएगी.

तबलीग़ी जमात क्या है

ये एक धार्मिक संस्था है जो 1920 से चली आ रही है. दिल्ली में निज़ामुद्दीन इलाक़े में इसका हेडक्वॉर्टर है, जिसे मरक़ज़ भी कहते हैं. मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे जफ़र सरेशवाला तबलीग़ी जमात से सालों से जुड़े हैं. उनके मुताबिक़ ये विश्व की सबसे बड़ी मुसलमानों की संस्था है. इसके सेंटर 140 देशों में हैं.
भारत में सभी बड़े शहरों में इसका मरक़ज़ है यानी केंद्र है. इन मरक़ज़ों में साल भर इज़्तेमा चलती रहती हैं. मतलब लोग आते जाते रहते हैं.
कोरोना संक्रमण के पॉजिटिव मामले पाए जाने की खब़र फैली तब भी वहां इज्तेमा चली रही थी. इज्तेमा के दौरान हर राज्य से हज़ारों की संख्या में लोग आते हैं. हर इज्तेमा 3-5 दिन तक चलती है.
मार्च के महीने में भी यहां कई राज्यों से लोग इज्तेमा के लिए आए थे. जिसमें कई विदेशी भी थे. भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी इज्तेमा उसी वक़्त चल रहा था.
हालांकि विदेशों में कई जगह पर कोरोना के मामले बढ़ते ही इस तरह के आयोजन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी. लेकिन दिल्ली में ऐसा नहीं हुआ.

तबलीग़ी जमात का पक्ष

ताज़ा घटनाक्रम को देखते हुए सोमवार देर रात तबलीग़ी जमात ने एक प्रेस नोट जारी किया है. प्रेस नोट के मुताबिक़ उनका ये कार्यक्रम साल भर पहले से तय था. जब प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ़्यू का एलान किया, तब तबलीग़ी जमात ने अपने यहाँ चल रहे कार्यक्रम पर तुरंत रोक दिया था.
"लेकिन पूर्ण लॉकडाउन के एलान के पहले भी कुछ राज्यों ने अपनी तरफ से ट्रेन और बस सेवाएं रोक दी थी. इस दौरान जहां के लोग वापस जा सकते थे उनको वापस भेजना का पूरा बंदोबस्त तबलीग़ी जमात प्रबंधन ने किया. इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी."
"जिसकी वजह से कई लोग वापस नहीं जा सके और वो वहीं मरक़ज़ में रह रहे थे. प्रेस रिलीज़ में ऐसे लोगों की तादाद 1000 के क़रीब बताई गई है. ये पूरा मामला पुलिस तक 24 मार्च को पहुंचा जब स्थानीय पुलिस ने मरक़ज़ को बंद करने के लिए नोटिस भेजा."
तबलीग़ी जमात के मुताबिक़ पुलिस के इस नोटिस का उन्होंने उसी दिन जवाब दिया कि आयोजन को रोक दिया गया है और 1500 वापस चले गए हैं. लेकिन तकरीबन 1000 लोग फंसे हैं. इस चिट्ठी के बाद, 26 तारीख को एसडीएम के साथ एक मीटिंग हुई. अगले दिन 6 लोगों को टेस्ट के लिए ले जाया गया.
"फिर 28 मार्च को 33 लोगों को टेस्ट के लिए ले जाया गया. हमने उस वक्त भी स्थानीय प्रशासन से लोगों को अपने घर वापस भेजने के लिए गाड़ियों के इंतजाम करने की गुज़ारिश की थी. 28 मार्च को ही एसीपी लाजपत नगर की तरफ से क़ानूनी कार्रवाई का एक नोटिस भी आया, जिसका अगले दिन यानी 29 मार्च को ही हमने जवाब भेजा."
और 30 मार्च यानी सोमवार को पूरा मामला मीडिया में आ गया.

तबलीग़ी जमात का विदेश कनेक्शन

ये वही तबलीग़ी जमात है जिसका एक धार्मिक आयोजन मलेशिया में कुआलालंपुर की एक मस्जिद में 27 फ़रवरी से एक मार्च तक था. ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट भी सामने आई हैं जिनसे पता चलता है कि इसी आयोजन में आए लोगों से दक्षिण-पूर्वी एशिया के कई देशों में कोरोना वायरस का संक्रमण फैला.
अल ज़जीरा की रिपोर्ट के मुताबिक़ मलोशिया में कोरोना संक्रमण के कुल जितने मामले पाए गए हैं उनमें से दो-तिहाई तबलीग़ी जमात के आयोजन का हिस्सा थे. ब्रुनेई में कुल 40 में से 38 लोग इसी मस्जिद के आयोजन में शामिल होने वाले कोरोना से संक्रमित पाए गए थे.
सिंगापुर, मंगोलिया समेत कई देशों में इस मस्जिद के आयोजन से कोरोना फैला था. पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक़ तबलीग़ी जमात के आयोजन में शामिल कई लोगों में उनके देश में भी कोरोना संक्रमण पाया गया है.

500 लोग विदेशों से आए थे...

अखबार के मुताबिक़ मरक़ज में शामिल 35 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें से 27 लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. पाकिस्तान में भी तकरीबन 1200 लोगों ने इस आयोजन में शिरकत की थी, जिनमें 500 लोग विदेशों से आए थे.
इस महीने की शुरुआत में ही दिल्ली सरकार ने किसी भी तरह के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक आयोजनों पर 31 मार्च तक के लिए पाबंदी लगा दी थी. इसके अलावा विरोध-प्रदर्शनों में 50 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर भी रोक लगा दी गई थी.
प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस के संक्रमण के ख़तरे को देखते हुए 25 मार्च से 21 दिनों की लॉकडाउन की घोषणा कर रखी है. लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस ड्रोन से नज़र रख रही है.

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