बीजेपी का महबूबा सरकार से ब्रेकअप!

जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ बीजेपी गठबंधन से अलग हो गई है जिसकी वजह से मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की सरकार अल्पमत में आ गई है.
जम्मू कश्मीर के लिए बीजेपी के प्रभारी राममाधव ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में गठबंधन से अलग होने की वजह बताते हुए कहा, ''हमने तीन साल पहले जो सरकार बनाई थी, जिन उद्देश्यों को लेकर बनाई थी, उनकी पूर्ति की दिशा में हम कितने सफल हो पा रहे हैं, उस पर विस्तृत चर्चा हुई.''
उन्होंने कहा, ''पिछले दिनों जम्मू कश्मीर में जो घटनाएं हुई हैं, उन पर तमाम इनपुट लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से परामर्श लेने के बाद आज हमने निर्णय लिया है कि गठबंधन सरकार में चलना संभव नहीं होगा.''

'सरकार ने अपनी ग़लती मानी'

कांग्रेस ने इस घटनाक्रम पर कहा है कि बीजेपी जम्मू कश्मीर में अपनी नाकामी से नहीं भाग सकती है.
नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा, ''मुझे खुशी है कि केंद्र सरकार ने अपनी ग़लती मान ली है. बीजेपी-पीडीपी तीन साल तक सरकार चलाने में बुरी तरह विफल हुए. तीन सालों में राज्य को तबाह कर दिया.''
ग़ुलाम नबी आज़ाद ने ये भी कहा कि ''जो हुआ ठीक हुआ, जम्मू कश्मीर के लोग आगे तबाही से बच गए.''
उन्होंने इसे भारत सरकार की नाकामी बताते हुए कहा कि बीजेपी सारा ठीकरा पीडीपी के सिर नहीं फोड़ सकती.

जम्मू कश्मीर में कौन कहां पर

जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटें हैं. मौजूदा विधानसभा में महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी के कुल 28 विधायक हैं.
वहीं बीजेपी 25 सीटों के साथ दूसरे पायदान पर है. उमर अब्दुल्लाह की नेशनल कांफ्रेंस 15 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि कांग्रेस 12 सीटों के साथ चौथे स्थान पर है.
वहीं गठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे निर्मल सिंह ने कहा, ''बीजेपी के मंत्रियों ने राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है.''
राममाधव का कहना था, ''पिछले तीन साल से ज्यादा समय में बीजेपी अपनी तरफ से सरकार अच्छे से चलाने की कोशिश कर रही थी, राज्य के तीनों प्रमुख हिस्सों में विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही थी. आज जो हालात राज्य में बने हैं, जिसमें एक भारी मात्रा में आतंकवाद और हिंसा बढ़ गई. उग्रवाद बढ़ रहा है, नागरिकों के मौलिक अधिकार और बोलने की आज़ादी ख़तरे में पड़ गए हैं.''

शुजात बुखारी की हत्या का हवाला

राममाधव ने पीडीपी से गठबंधन होने की तमाम वजहें गिनाते हुए वरिष्ठ पत्रकार शुजात बुख़ारी की गोली मारकर हत्या किए जाने का भी जिक्र किया.
केंद्र सरकार ने दो दिन पहले ही जम्मू कश्मीर में घोषित एकतरफा संघर्षविराम को और आगे नहीं बढ़ाने का फ़ैसला किया था. यह संघर्षविराम रमज़ान के महीने के दौरान राज्य में 16 मई को घोषित किया गया था. गृह मंत्रालय ने कहा कि चरमपंथियों के ख़िलाफ़ फिर से अभियान शुरू किया जाएगा. यह घोषणा ईद के एक दिन बाद की गई थी.
क्या पीडीपी गठबंधन से अलग होने की एक वजह संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने पर पीडीपी के साथ मतभेदों का होना था, संवाददाताओं के इस सवाल पर राममाधव ने कोई सीधा जबाव नहीं दिया.
उधर, बीजेपी की सहयोगी रही शिवसेना ने कहा है कि यह गठजोड़ अप्राकृतिक और अनैतिक था। सेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि पीडीपी और बीजेपी की दोस्ती राष्ट्रद्रोही था। उन्होंने कहा कि ये गठबंधन टूटना तय था क्योंकि 2019 में बीजेपी जवाब देने में नाकाम रहती।

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