पैराडाइज़ पेपर लीक करने वाले ICIJ के ये पांच कारनामे

पैराडाइज़ पेपर्स में अब तक कई इंडियन्स का नाम आ चुका है. इनमें अमिताभ बच्चन, संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त, केन्द्रीय राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और बीजेपी से राज्यसभा में सांसद रवीन्द्र किशोर सिन्हा के नाम भी शामिल हैं. पैराडाइज़ पेपर लीक का बम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने गिराया. सबसे पहले दस्तावेज़ लीक होकर जर्मनी के अखबार सूदग़ाडचे ज़ाइटुंग (Süddeutsche Zeitung) के पास पहुंचे और फिर ICIJ से जुड़े दुनियाभर के अखबारों ने इस डाटा की स्कैनिंग की.
2017 का पुलित्ज़र पुरस्कार (एक्सप्लेनेटरी जर्नलिज़म) ‘पनामा पेपर्स’ के लिए तीन संस्थानों को दिया गया था – द मैक्-क्लाची कंपनी, मायामी हेराल्ड और ICIJ. खोजी पत्रकारिता की दुनिया में ICIJ एक जाना-माना नाम है. आज हम जानेंगे कि ICIJ है क्या चीज़ और साथ ही ज़िक्र होगा उसकी पांच धमाकेदार खोजी रिपोर्ट्स का- 

इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ)
ICIJ एक ऐसा समूह है, जिसमें 70 देशों के 200 से ज़्यादा खोजी पत्रकार शामिल हैं. ICIJ ने कई देशों, संस्थानों और लोगों की पोल-पट्टी खोली है. 1997 में इसकी शुरुआत अमेरिकी जर्नलिस्ट चक लुइस ने की थी. जुलाई, 2007 में इसे नॉन प्रोफ़िट ऑर्गनाइज़ेशन का दर्जा दे दिया गया. इन 200 से ज़्यादा खोजी पत्रकारों में पांच भारतीय भी हैं. इनके नाम हैं-
1. रितु सरीन, जो इंडियन एक्सप्रेस में न्यूज़ और इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट की एग्ज़ीक्यूटिव एडिटर हैं.
2. मुरली कृष्णन, जो जर्मन अखबार Deutsche Welle के लिए संवाददाता और ब्रॉडकास्टर का काम करते हैं, साथ ही नियमित रूप से Radio Australia’s Connect Asia, Radio France International और BBC के ‘अप ऑल नाइट’ के लिए भी काम करते हैं.
3. सैयद नज़कात, जो दिल्ली बेस्ड मीडिया कंपनी DataLEADS के फाउंडर और एडिटर इन चीफ़ हैं. साथ ही भारत की एक नॉन प्रॉफ़िट ऑर्गनाइज़ेशन Centre for Investigative Journalism के फ़ाउंडर भी हैं, जिसका मकसद भारत में हो रही पत्रकारिता पर नज़र रखने जैसे ज़रूरी काम को प्रमोट करना है.
4. यूसुफ़ जमील, जो भारत में छपने वाले अखबार The Asian Age के संवाददाता हैं. यूसुफ का ज़्यादातर काम कश्मीर के विवादित मुद्दों को कवर करने की दिशा में है.
5. राकेश कलशियान, जो पहले आउटलुक मैगज़ीन में रिपोर्टर थे. यहां उन्होंने विज्ञान और पर्यावरण पर रिपोर्टिंग की.
‘पनामा’, ‘बहामा’ और ‘पैराडाइज़.’ इन तीन पेपर लीक के बारे में हम जानते हैं.  अब जानिए ICIJ द्वारा की गई पांच और धांसू इनवेस्टिगेशन्सः 

1. कैसे विश्व बैंक समूह के ऋण से 34 लाख लोगों की ज़िंदगी बर्बाद हो गई

साल- 2015
विश्व बैंक दुनियाभर की सरकारों और कंपनियों को कर्ज़ देता है. इस पैसे से दुनियाभर में बड़ी-बड़ी परियोजनाएं चलाइ जाती हैं. ICIJ ने विश्व बैंक से पैसा पाने वाले कंपनियों के रिकॉर्ड खंगाले. तब पता चला कि विश्व बैंक समूह ने पिछले दस सालों में ऐसे कई प्रोजेक्ट्स को फंडिंग दी, जिनसे दुनियाभर के 34 लाख गरीबों की ज़िंदगी बर्बाद हो गई. इन प्रोजेक्ट्स के कारण उनकी ज़मीनें और उनका घर छिन गया.  ये भी सामने आया कि 2009 से लेकर 2013 तक विश्व बैंक समूह के ऋणदाताओं ने करीबन 323 करोड़ रुपए से ज़्यादा का ऋण ऐसे प्रोजेक्ट्स को दिया जो पर्यावरण और समाज के लिहाज़ से हमेशा-हमेशा के लिए खतरा बन गए. ICIJ की टीम ने इस रिपोर्ट के लिए हज़ारों लोगों का इंटरव्यू किया था और छह हज़ार से ज़्यादा बैंक दस्तावेजों की जांच की थी.

2. मृत शरीरों के अंगों की तस्करी

साल- 2012
रिश्तेदारों के मर जाने के बाद कई लोग उनकी हड्डियां और खाल डोनेट कर देते हैं. ये दंत चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी, स्पाइनल सर्जरी वगैरह में इस्तेमाल होने वाली चीज़ों में बदल दिए जाते हैं. ICIJ ने पाया कि मरीज़ों को अक्सर नहीं बताया जाता था कि जो प्रोडक्ट उन्हें दिया जा रहा है, वो लाश से बना है. इससे भी खतरनाक बात ये थी कि कई बार परिवार से सहमति लिए बिना मृतक के शरीर से टिशूज़, खाल, हड्डी जैसी चीज़ें निकाल दी जाती थीं. इस तरह के सबसे ज़्यादा मामले यूक्रेन में पाए गए. इस रिपोर्ट के लिए 11 देशों में जांच-पड़ताल की गई. इंडस्ट्री में काम करने वाले, सरकारी कर्मचारी, सर्जन, वकील या दोषियों को मिलाकर 200 से ज़्यादा लोगों से बात की गई. पीड़ित परिवारों से उनकी आपबीती भी सुनी गई.

3. पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या की पूरी जांच

2002 में वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल को पाकिस्तान में किडनैप कर हत्या कर दी गई थी. ICIJ ने इस केस की तह तक जाने के लिए ‘द पर्ल प्रोजेक्ट’ शुरू किया. इसमें उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्र पत्रकारों की मदद ली थी. इसके लिए तीन साल तक डेनियल पर्ल की हत्या से जुड़े 27 लोगों के बारे में जानकारी इकट्ठा की गई. फिर उन 27 लोगों की इस हत्या में क्या भागीदारी रही, उसे एक साथ दुनिया के सामने रख दिया गया. इन 27 लोगों में से एक था अहमद ओमर सईद शेख़, जिसकी असल कहानी पर इंडिया में ‘ओमेर्टा’ नाम की फ़िल्म भी बनी है, जिसकी रिलीज़ डेट अभी फ़ाइनल नहीं है.

4. क्राइम और तंबाकू की तस्करी

2000 से लेकर 2001 तक ICIJ ने कई ऐसी खोजी रिपोर्ट छापीं, जिनमें दुनिया की अग्रणी तम्बाकू कंपनियों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया गया था. ICIJ ने बताया कि कैसे ये कंपनियां दुनिया भर में सिगरेट की तस्करी करने के लिए अपराधियों का सहारा लेती हैं. छह देशों में चली जांच से सामने आया कि कैसे ब्रिटिश अमेरिकन टबैको, फ़िलिप मॉरिस और आर.जे. रेनॉल्ड्स जैसी कंपनियां हॉन्ग कॉन्ग, कनाडा, कोलंबिया और इटली के अपराधियों के संपर्क में हैं.

5. स्विस लीक्स

ICIJ की इस जांच ने HSBC बैंक की स्विस ब्रांच को एक्सपोज़ कर दिया था. स्विस बैंक में अकाउंट होना पूरी तरह कानूनी है. लेकिन लीक हुए दस्तावेज़ों से पता चला कि गैर कानूनी तरीके से कमाए गए पैसे इन बैंकों में कितनी आसानी से जमा हो जाते थे. 60 हज़ार फ़ाइलें लीक हुई थीं. जिनमें HSBC के एक लाख से ऊपर क्लाइंट्स की डीटेल्स थीं. 200 से ज़्यादा देशों के कई बड़े राजनेता, सेलेब्रिटीज़, बिज़नेस लीडर्स के नाम थे. ये दस्तावेज़ ICIJ को फ्रांस के अखबार ली मॉन्डे ने दिए थे. बाद में ICIJ ने इसकी जांच की थी.

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