आरुषि हत्याकांड में तलवार दंपत्ति बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि हत्याकांड में तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया है.
मामले से जुड़े वकील एके निगम ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति की अपील मंजूर कर ली है.
अभी तक कोर्ट के फैसले की तफसील से जानकारी सामने नहीं आई है.
इससे पहले 25 नवंबर 2013 को सीबीआई कोर्ट ने तलवार दंपत्ति को उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी उसके बाद दोनों गाज़ियाबाद की डासना जेल में सज़ा काट रहे थे.

क्या है मामला

दंत चिकित्सक राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि तलवार और नौकर हेमराज की हत्या 15-16 मई 2008 की दरमियानी रात नोएडा स्थित उनके घर पर हुई थी.
आरुषि अपने कमरे में मृत पाई गई जबकि एक दिन बाद नौकर हेमराज का शव तलवार के पड़ोसी की छत से बरामद हुआ था.
इस मामले में कई मोड़ आए, सीबीआई जांच हुई जिसमें 30 महीने बाद क्लोज़र रिपोर्ट पेश की गई.
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और इसके आदेश पर फिर से मामला शुरू हुआ और सीबीआई अदालत ने तलवार दंपत्ति को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई.
इस फैसले के ख़िलाफ़ ही उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी.
क्या थी आईजी की थिअरी
तत्कालीन आईजी गुरदर्शन सिंह ने 23 मई 2015 को नोएडा पुलिस की ओर से की गई जांच का हवाला देते हुए बताया था कि डॉ. राजेश तलवार ने आरुषि और हेमराज को आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद पहले हेमराज की और बाद में आरुषि की हत्या की। हालांकि, दबाव बढ़ने पर आईजी ने अपनी थिअरी को बदल दिया और कहा कि डॉ. तलवार ने अवैध संबंधों के विरोध पर पहले आरुषि को मारा और बाद में हेमराज को। दोहरे हत्याकांड में पुलिस ने आरुषि की मां डॉ. नूपुर तलवार को साजिश में शामिल बताया था। 

पैरंट्स पर शुरू से ही शक क्यों?डेंटिस्ट डॉ. राजेश तलवार की 14 साल की बेटी आरुषि की लाश उसी के बेडरूम में खून से लथपथ मिली थी। घर का नौकर हेमराज लापता था, लिहाजा पुलिस का सबसे पहला शक उसी पर जाना तय था। तलवार दंपती का पुलिस को जोर देकर कहना कि उनकी बेटी का हत्यारा हेमराज ही है, पुलिस के लिए चौकाने वाला था। तलवार दंपती पर पुलिस को शक इसलिए भी हुआ कि उन्होंने खुद बेटी की हत्या की जानकारी पुलिस को नहीं दी थी, बल्कि उनके रिश्तेदार ने दी थी। बेटी की हत्या के अगले ही दिन (17 मई 2008) तलवार दंपती का व्यवहार माहौल के विपरीत था। 

पुलिस ने जब छत पर जाने की कोशिश की, तो तलवार दंपती ने टालमटोल करने की कोशिश की। बिना पूरी पड़ताल किए एक टीम हेमराज की तलाश में नेपाल बॉर्डर के लिए रवाना भी कर दी गई। अगली सुबह 17 मई को हेमराज की लाश डॉ. तलवार के घर की छत पर मिली। दोहरे हत्याकांड के बाद शक की सुई पूरी तरह डॉ. राजेश तलवार की तरफ घूमने लगी। तलवार दंपती के घर में रहते हुए दो हत्याएं हुईं और उन्हें पता न चला, इस पर सवाल उठ रहे थे। लेकिन पिता द्वारा अपनी इकलौती संतान की हत्या करने को कोई मानने को तैयार नहीं था। पुलिस ने यहीं से ऑनर किलिंग के एंगल से जांच शुरू की। पर्याप्त सबूतों का हवाला देकर 23 मई को नोएडा पुलिस ने डॉ. राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया था।

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