डोकलाम से सेना हटाने को तैयार भारत और चीन

भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीनों से डोकलाम में चल रहे विवाद को हल करने की दिशा में अहम सहमति बनी है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक़ दोनों देश डोकलाम से सेना हटाने को तैयार हो गए हैं.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया, "हाल के हफ्तों में डोकलाम को लेकर भारत और चीन ने कूटनीतिक बातचीत जारी रखी है. इस बातचीत में हमने एक दूसरे की चिंताओं और हितों पर बात की. इस आधार पर डोकलाम पर जारी विवाद को लेकर हमने सीमा पर सेना हटाने का फैसला किया है और इस पर कार्रवाई शुरू हो गई है."

क्या है विवाद

सीमा विवाद के कारण बीते कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी.
सीमा विवाद के कारण दोनों देश 1962 में युद्ध के मैदान में भी आमने-सामने खड़े हो चुके हैं, लेकिन अभी भी सीमा पर मौजूद कुछ इलाकों को लेकर विवाद है जो कभी-कभी तनाव की वजह बनता है.
मई में डोकलाम को लेकर शुरू हुए तनाव के बीच भारत और चीन ने सीमा पर अपनी फ़ौज की तैनाती बढ़ा दी और एक-दूसरे से उनकी सेना को वापस बुलाने के लिए कहा.
मामला तब शुरू हुआ जब भारत ने पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश का विरोध किया. भारत में डोकलाम के नाम से जाने जाने वाले इस इलाके को चीन में डोंगलोंग नाम से जाना जाता है.

डोकलाम का इलाका

ये इलाका वहां है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं. भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं और भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है.
भारत को इस बात की चिंता है कि इस सड़क का काम पूरा हो गया तो देश के उत्तर पूर्वी राज्यों को देश से जोड़ने वाली 20 किलोमीटर चौड़ी कड़ी यानी मुर्गी की गरदन जैसे इस इलाके पर चीन की पहुंच बढ़ जाएगी.
ये वही इलाका है जो भारत को सेवन सिस्टर्स नाम से जानी जाने वाली उत्तर पूर्वी राज्यों से जोड़ता है और सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.

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