गोरखपुर अस्पताल में बच्चों की मौत का आंकड़ा हुआ 63, ऑक्सीजन सप्लायर कंपनी का था 68.58 लाख का बकाया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गढ़ गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से हुई मौत का आंकड़ा बढ़कर 63 हो गया है। आज (12 अगस्त को) भी 11 साल के एक बच्चे ने दम तोड़ दिया।
वह भी इन्सेफ्लाइटिस से पीड़ित था। इस बीच ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने के बारे में अधिकारियों के बीच पत्राचार की एक कॉपी सामने आई है। एचटी मीडिया के मुताबिक ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स का अस्पताल पर कुल बकाया 68,58, 596 रुपये था। पैसे का भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी।
बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज अस्पताल में  बच्चों की मौत की सरकार ने मेजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इस बीच, अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, वहां किसी तरह की अनोहनी की आशंका को देखते हुए भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात कर दिया गया है।
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने मामले पर विपक्षी दलों से राजनीति नहीं करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि मामले में पूरी तरह से निष्पक्ष जांच की जाएगी और त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इसे एक गंभीर मसला बताया है। इस बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कई मरीजों के परिजनों ने इलाज में कोताही बरतने, भेदभाव करने और बाहर से दवाई और भोजन खरीदने के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए हैं।
एचटी मीडिया से बात करते हुए सप्लायर कंपनी पुष्पा सेल्स के दीपांकर शर्मा ने बताया कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से पहले ही बकाये का राशि का भुगतान करने और 10 लाख से ज्यादा की राशि बकाया होने पर ऑक्सीजन सप्लाई रोकने की बात बता दी थी। उन्होंने बताया कि इस बात का उल्लेख एग्रीमेंट में भी है। जब ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मरने लगे तब परेशान डॉक्टरों ने उन्हें कई बार फोन किए और ऑक्सीजन सप्लाई बहाल करने को कहा। इसके एवज में असपताल उन्हें 22 लाख रुपये का भुगतान करने की प्रकिया शुरू की। हालांकि, शर्मा ने तब लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई करने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। पिछले साल अप्रैल में भी कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई रोकी थी लेकिन तब ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ था और समय रहते मामले को सुलझा लिया गया था।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सिजन की कमी की वजह से हुई मौतों के मामले में राज्य सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो रहा है। अस्पताल की ओर से भी अब लीपापोती की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि एक महीने से ऑक्सिजन संकट की खबर स्थानीय मीडिया में दी जा रही थी, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह को इस बारे में जानकारी तक नहीं थी। हैरानी की बात तो यह है कि सीएम योगी ने खुद दो दिन पहले इस अस्पताल का दौरा किया था, लेकिन फिर भी इतनी बड़ी घटना हो गई। ऐसे में विपक्षी दलों ने सरकार को निशाने पर ले लिया है। आज दिन भर गोरखपुर में सरकार के मंत्रियों और विपक्ष के नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
48 घंटों में 36 बच्चों सहित 54 मौतों ने पूरे देश को हिला दिया है। सरकार के लिए यह शर्मिंदगी की वजह इसलिए भी बन गया है कि गोरखपुर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संसदीय क्षेत्र रहा है और मुख्यमंत्री अकसर यहां का दौरा करते रहते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई? इस संबंध में जो बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वह साफ इशारा कर रही हैं कि मामले की पूरी जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों ने लापरवाही बरती जो कई घर के चिरागों को बुझा गई।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह और मेडिकल एजुकेशन मिनिस्टर आशुतोष टंडन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने के बाद गोरखपुर के रवाना हो रहे हैं। लौटने के बाद वे सीएम को पूरी रिपोर्ट सौंपेंगे। गोरखपुर रवाना होने से पहले सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि विपक्षों दलों को मौत पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'मामले की जांच कराई जाएगी और जल्द ऐक्शन लिया जाएगा। यह एक गंभीर मामला है।' मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि मुख्यमंत्री हालात पर नजर रखे हुए हैं।

घटना के बाद अब अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतें खुलकर सामने आने लगी हैं। अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजनों का कहना है कि उन्हें खाना और दवायें बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी की बात भी सामने आई है। एक डॉक्टर ने कहा, 'मॉनसून में मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है। ऐसे में हमें एक बेड पर 2 मरीजों को लेटाना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी है, लेकिन हम लगातर उन्हें मॉनिटर करते हैं।' इस बीच अस्पताल में ऑक्सिजन सिलिंडरों की सप्लाई शुरू हो गई है।
सवाल यह पूछा जा रहा है कि जब ऑक्सिजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स की ओर से 1 अगस्त को ही पत्र के जरिए बकाया 63.65 लाख रुपये का भुगतान न होने के कारण सप्लाई बाधित होने की चेतावनी दी गई थी, तो फिर अस्पताल प्रशासन आखिर क्यों नहीं चेता? इन्हीं तमाम सवालों को अब विपक्ष की आवाज मिल रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर गोरखपुर पहुंच रहे हैं। उनके अलावा कांग्रेस सांसद संजय सिंह भी गोरखपुर आएंगे।

उधर यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी शुक्रवार शाम ट्वीट के जरिए इस घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतकों का पोस्टमॉर्टम तक नहीं किया गया है, परिजनों को लाश देकर भगा दिया गया और मरीजों के भर्ती कार्ड भी गायब कर दिए गए हैं। बीएसपी भी इस मसले पर योगी सरकार के खिलाफ आक्रामक हो गई है। उसने तंज कसते हुए कहा है कि सरकार को जब गाय और गोबर से फुर्सत मिलेगी, तब वह बच्चों को देखेगी। पार्टी के कहा है कि सरकार को बर्खास्त करके स्वास्थ्य मंत्री सहित पूरे स्टाफ को जेल भेजा जाना चाहिए।
"मृतकों के परिजनों को लाश देकर भगा दिया गया, मृतक का पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ है, भर्ती कार्ड भी गायब कर दिया गया है । अत्यन्त दुखद ।- अखिलेश यादव"

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