...तो विधानसभा में मिला पाउडर PETN नहीं!

विधानसभा में मिले संदिग्ध पाउडर की फरेंसिक जांच और उसके पीईटीएन (प्लास्टिक एक्सप्लोसिव) होने पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार ने बरामद पाउडर की प्राथमिक जांच रिपोर्ट (जो कोर्ट में मान्य नहीं है) के आधार पर ही उसे खतरनाक प्लास्टिक एक्सप्लोसिव पीईटीएन बता दिया। जबकि सरकार के ही मुताबिक अब तक उसकी अंतिम रिपोर्ट नहीं आई है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक आगरा फरेंसिक लैब में हुई संदिग्ध पाउडर की जांच में उसके पीईटीएन होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि सरकार ऐसी किसी भी रिपोर्ट को खारिज कर रही है।

सरकारी दावे और उनका सच

दावा: सोमवार देर रात आगरा फरेंसिक लैब की रिपोर्ट के मीडिया में वायरल होने के बाद प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने कहा कि पाउडर को जांच के लिए आगरा एफएसएल नहीं भेजा गया है। आगरा एफएसएल में ऐसी मशीनें नहीं हैं, जो इस तरह के एक्सप्लोसिव का टेस्ट कर सकें।

सच: यूपी में आगरा की फरेंसिक लैब ही ऐसी है, जहां विस्फोटकों की जांच होती है। प्रदेश भर से बरामद विस्फोटक जांच के लिए आगरा ही भेजे जाते हैं। यूपी पुलिस की वेबसाइट भी यही दावा करती है। स्टेट फरेंसिक लैब लखनऊ के 17 साल के इतिहास में आज तक यहां कोई भी एक्सप्लोसिव टेस्ट नहीं हुआ है। ना ही यहां एक्सप्लोसिव जांच के एक्सपर्ट हैं।

आगरा भेजा गया सैंपल
सूत्रों के मुताबिक 13 जुलाई को शाम 5.30 पर पाउडर हजरतगंज कोतवाली से एफएसएल, लखनऊ भेजा गया। इसका लॉट नंबर 1182CHEM-2017 था। प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 14 जुलाई को एफएसएल के नरेंद्र कुमार और श्याम सुंदर फरेंसिक एक्सप्लोसिव वैन से सैंपल लेकर आगरा गए। इसका लॉट नंबर 4870 Ex-2017 था। आगरा एफएसएल में इसकी जांच के लिए पांच सदस्यीय कमिटी का गठन हुआ। कमिटी में डेप्युटी डायरेक्टर डॉ केके वर्मा, डेप्युटी डायरेक्टर केमिस्ट्री एंड एक्स्प्लोसिव डॉ सुरेंद्र कुमार यादव, डेप्युटी डायरेक्टर टॉक्सिकोलॉजी अजय कुमार, एसओ जय राजवीर और प्रमोद कुमार गुप्ता शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक आगरा एफएसएल ने 17 जुलाई को रिपोर्ट तैयार की, जिसमें दावा था कि पाउडर पीईटीएन नहीं है।

फिजिक्स और कम्प्यूटर फरेंसिक साइंस के एक्सपर्ट से करवाई जांच
सूत्रों के मुताबिक लखनऊ एफएसएल में कोई एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट नहीं था। जिन तीन लोगों ने पाउडर की जांच की वह एफएसएल की फिजिक्स एंड कम्प्यूटर साइंस इकाई से जुड़े हैं। जांच करने वालों में डेप्युटी डायरेक्टर अरुण कुमार शर्मा, साइंटिफिक अफसर नरेंद्र कुमार और रसायन इकाई के सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट मनोज कुमार शामिल हैं।

एनआईए भी कतरा रही है जांच लेने में
सूत्रों के मुताबिक पाउडर के पीईटीएन होने को लेकर उठे सवालों के बाद एनआईए भी मामले की जांच अपने हाथ में लेने से कतरा रही है। आईजी एटीएस असीम अरुण ने रविवार को दावा किया था कि एनआईए सोमवार को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर देगी। लेकिन मंगलवार को भी एनआईए ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। सरकार ने शनिवार को ही एनआईए जांच के लिए सिफारिश भेज दी थी।

तो अफसरों ने गुमराह किया!
जांच रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों के बाद चर्चा है कि अफसरों ने अतिउत्साह में सीएम को गुमराह कर दिया। आगरा एफएसएल की कथित रिपोर्ट के परिणाम वायरल होने के बाद मंगलवार को प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने एफएसएल के डायरेक्टर डॉ श्याम बिहारी उपाध्याय को तलब भी किया है। एडीजी एलओ आनन्द कुमार ने भी उनसे पूरी कार्यवाही की लिखित रिपोर्ट मांगी है।

वहीं इस मामले पर आईजी एटीएस असीम अरुण ने कहा, 'बरामद पाउडर के सैंपल को जांच के लिए लखनऊ एफएसएल भेजा गया था। प्राथमिक रिपोर्ट में उसके पीईटीएन होने के सकारात्मक परिणाम आए थे। एनआईए अब तक एटीएस से केस लेने पर विचार कर रही है, इसलिए सैंपल को जांच के लिए नहीं भेजा है। एनआईए को अगर समय लगेगा तो दो दिन के अंदर सैंपल को दूसरी लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। स्टेट फरेंसिक लैब ने कहां से सैंपल की जांच कराई, इसकी जानकारी पुलिस और एटीएस को नहीं है।'

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