यू-टर्न के मास्टर रहे हैं नीतीश कुमार

सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने का हवाला देकर कभी एनडीए का साथ छोड़ने वाले नीतीश कुमार आज फिर बीजेपी की अगुआई वाले इस गठबंधन के साथ बिहार की सत्ता पर दोबारा काबिज होने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, आम चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी शिकस्त का सामना करने के बाद उन्होंने अपने कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद का हाथ थामा था। दोनों ने बिहार में 20 महीने तक सरकार चलाई और आज फिर नीतीश ने लालू से राहें अलग कर ली हैं। नीतीश का राजनीतिक सफर ऐसे कई यू-टर्न से भरा है। डालते हैं एक नजर: 
बीजेपी की मदद से तीन बार CM
1995 में लालू के हाथों शिकस्त का सामना करने के बाद नीतीश की समता पार्टी ने बीजेपी के साथ 1996 में गठजोड़ किया। लालू कट्टर राजनीतिक दुश्मन बन गए। बाद में समता पार्टी जेडीयू में तब्दील हो गई, लेकिन उसका और बीजेपी का गठबंधन बना रहा। 2000 में बीजेपी की मदद से नीतीश कुमार पहली बार 7 दिन के लिए सीएम बने। इसके बाद, इस्तीफा देकर केंद्र में रेल मंत्री बनने चले गए। बाद में बीजेपी के समर्थन से दूसरी बार नवंबर 2005 में बिहार के सीएम बने और 2010 तक शासन किया। दोबारा विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी और जेडीयू की अगुआई वाले गठबंधन को करीब तीन चौथाई बहुमत मिला। नीतीश 2010 में तीसरी बार सीएम बने। 

मोदी को वजह बता बीजेपी का साथ छोड़ा
नीतीश ने जून 2013 में बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ दिया। तत्कालीन गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी को एनडीए गठबंधन की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध करते हुए उन्होंने यह फैसला लिया था। राजनीतिक विरोधी आरोप लगाते हैं कि नीतीश खुद पीएम कैंडिडेट बनना चाहते थे। बिहार में जेडीयू का बीजेपी के साथ गठबंधन टूट गया, लेकिन कांग्रेस की मदद से नीतीश अपनी सरकार बचाने में कामयाब रहे। 

मांझी को सीएम बनाया, फिर जबरन हटाया 
2014 आम चुनाव में नीतीश कुमार को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। नैतिकता का हवाला देते हुए नीतीश ने सीएम की कुर्सी छोड़ दी। इसके बाद, महादलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी चुना। हालांकि, नीतीश की यह दरियादिली ज्यादा दिन तक कायम नहीं रही। मांझी से उनके मतभेद उभरे। इसके बाद, मांझी को जबरन कुर्सी से हटाकर नीतीश एक बार फिर सीएम बन गए। इस बार उनका कार्यकाल 22 फरवरी 2015 से लेकर 19 नवंबर 2015 तक रहा। 

कट्टर दुश्मन लालू का साथ, अब अलग हुए 
कभी आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नीतीश के बीच इतनी तल्खी थी कि राजनीतिक जानकारों को यकीन ही नहीं था कि दोनों कभी साथ भी आ सकते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी और एनडीए के उफान से टक्कर लेने के लिए लालू और नीतीश एक हुए। दोनों ने कांग्रेस को भी साथ लिया और 2015 बिहार विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन बनाया। इस तरह नीतीश पांचवीं बार सीएम बने। अब 20 महीने की सरकार चलाने के बाद नीतीश ने लालू के बेटे तेजस्वी पर करप्शन के आरोपों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया है। राजनीतिक आलोचकों का कहना है कि यह नैतिकता नहीं, अवसरवाद है। अगर नीतीश के करप्शन के आरोपों की इतनी चिंता थी तो उन्होंने चारा घोटाले में सजा पा चुके लालू के साथ महागठबंधन क्यों बनाया था?

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