लालू यादव को बड़ा झटका, पटना हाई कोर्ट ने खारिज की नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ RJD विधायक की याचिका

पटना हाई कोर्ट ने सोमवार (31 जुलाई) को लालू यादव की पार्टी राजद के विधायक सरोज यादव की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी द्वारा नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया था। राजद विधायक की मांग थी कि राजद के सबसे बड़े दल होने के नाते उसे पहले सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए था। नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को राजद और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। अगले ही दिन उन्होंने बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई। बीजेपी नेता सुशील मोदी ने नीतीश के साथ डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ली थी.

नीतीश के इस्तीफे के बाद से ही अटकल लगाई जा रही थी कि उनके इस फैसले के बाद जदयू में टूट हो सकती है। हालांकि दो दिन बाद ही नीतीश कुमार ने विधान सभा में बहुमत साबित कर दिया। 243 सदस्यो वाली बिहार विधान सभा में नीतीश सरकार के बहुमत प्रस्ताव के समर्थन में 131 विधायकों ने वोट दिया। वहीं विपक्ष में 108 वोट पड़े। जदयू के पास 71, एनडीए के 58, राजद के 80 और कांग्रेस के 27 विधायक हैं। शनिवार (29 जुलाई) को नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया और 27 सदस्यीय मंत्रिमंडल का गठन किया। जदयू के 14 विधायकों, बीजेपी के 12 और लोजपा के एक विधायक को नीतीश कैबिनेट में जगह मिली।
साल 2013 में नरेंद्र मोदी को बीजेपी में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में नीतीश कुमार ने एनडीए से अपना एक दशक से पुराना संबंध तोड़ लिया था। 2015 में हुए बिहार विधान सभा चुनाव से पहले नीतीश ने राजद और कांग्रेस के साथ “महागठबंधन” बनाकर चुनाव लड़ा और राज्य में बहुमत की सरकार बनाई। लालू यादव के दोनों बेटे नीतीश कैबिनेट में मंत्री बनाया था। लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव “महागठबंधन” सरकार में डिप्टी सीएम थे। जब सीबीआई ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत सात लोगों पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया तो जदयू नेता तेजस्वी के इस्तीफे की मांग करने लगे। राजद ने इस मांग को मानने से साफ मना कर दिया जिसके बाद नीतीश ने इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के सहयोग से सरकार बना ली।

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