एनडीए के 'राम' के सामने यूपीए की मीरा

राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए विपक्ष ने मीरा कुमार को चुन लिया है.

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली में विपक्ष के नेताओं की बैठक के बाद मीरा कुमार के नाम की घोषणा की.
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार दलित हैं और उनके पिता बाबू जगजीवन राम देश के बड़े दलित नेता थे.
भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार बनाया है.
दलित नेता रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाने के बाद से यूपीए पर भी किसी दलित को प्रत्याशी बनाने का दबाव था.
विपक्ष के अहम दल और बिहार में सत्तादारी जनता दल यूनाइटेड ने बिहार के राज्यपाल रहे रामनाथ कोविंद की उम्मीदवारी का समर्थन किया है.
अब यूपीए ने बिहार की ही दलित नेता को अपना उम्मीदवार बना लिया है. ऐसे में क्या जदयू कोविंद की उम्मीदवारी का समर्थन जारी रखेगी, ये देखना दिलचस्प होगा.
मीरा कुमार के नाम के ऐलान के तुरंत बाद राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि 'अब बिहार की बेटी का समर्थन करें नीतीश'.

राम बनाम मीरा

रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दोनों ही दलित नेता हैं. दोनों ने उच्च शिक्षा हासिल की है. मीरा कुमार और रामनाथ कोविंद दोनों ने ही वकालत की पढ़ाई की है.
मीरा कुमार लोकसभा की अध्यक्ष रह चुकी हैं. उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित मिरांडा हाऊस कॉलेज से पढ़ाई की है. वे साल 1970 में भारतीय विदेश सेवा के लिए चुनी गईं थीं. मीरा कई देशों में भारत की राजनयिक रह चुकी हैं.
दूसरी ओर कोविंद उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात ज़िले के एक साधारण परिवार में पैदा हुए थे. उन्होंने कानपुर से ही पढ़ाई की और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़ने के बाद राजनीति में प्रवेश किया. कोविंद भी प्रशासनिक सेवा के लिए चुने गए थे.
मीरा कुमार 72 साल की हैं जबकि रामनाथ कोविंद 71 साल के हैं.

मीरा कुमार आख़िर क्यों हैं यूपीए की पसंद

विपक्षी दलों ने एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुक़ाबले पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतार दिया है.
31 मार्च 1945 को जन्मी मीरा कुमार दलित समुदाय से हैं और वे पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं. उनकी मां इंद्राणी देवी एक समाजसेवी थीं.
साल 2009 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में मीरा कुमार ने कहा था कि उन्होंने क़ानून की परीक्षा ज़रूर पास की है, प्रैक्टिस के लिए कोर्ट कभी नहीं गईं.
वर्ष 1985 में वो पहली बार सांसद बनी, उन्होंने बिजनौर से चुनाव लड़ा था.
साल 2009 में मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला स्पीकर चुनी गईं थीं, उस समय के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लाल कृष्ण आडवाणी उन्हें स्पीकर की कुर्सी तक छोड़कर आए थे.
मीरा कुमार के बारे में एक वाकया बड़ा मशहूर है. साल 2012 में पाकिस्तान के दौरे पर गईं लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अपने भाषण में धाराप्रवाह उर्दू बोलकर पाकिस्तानी सांसदों और पत्रकारों को आश्चर्यचकित कर दिया था.
मीरा कुमार ने शुद्ध उर्दू में दिए अपने भाषण में फिराक गोरखपुरी, मजरूह सुल्तानपुरी और फैज़ अहमद फैज़ की कविताएँ भी पढ़ीं थी.

एक नज़र मीरा कुमार के कैरियर पर

मीरा कुमार ने 70 के दशक में भारतीय विदेश सेवा में नौकरी की और कई देशों में नियुक्त रहीं.
वे भारत-मॉरिशस संयुक्त आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं और ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग में भी काम कर चुकी हैं.
राजनीति में उनका प्रवेश 80 के दशक में हुआ. वर्ष 1985 में वे पहली बार बिजनौर से सांसद चुनी गईं.
मीरा कुमार के बारे में एक वाकया बड़ा मशहूर है. साल 2012 में पाकिस्तान के दौरे पर गईं लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने अपने भाषण में धाराप्रवाह उर्दू बोलकर पाकिस्तानी सांसदों और पत्रकारों को आश्चर्यचकित कर दिया था.
मीरा कुमार ने शुद्ध उर्दू में दिए अपने भाषण में फिराक गोरखपुरी, मजरूह सुल्तानपुरी और फैज़ अहमद फैज़ की कविताएँ भी पढ़ीं थी.

विपक्षी दलों ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतारकर राष्ट्रपति चुनाव को रोचक बना दिया है.
दलित नेता मायावती ने मीरा कुमार के नाम पर रज़ामंदी जताई है. पार्टी की ओर से सतीश मिश्रा ने बयान जारी कर कहा है कि विपक्षी दलों की बैठक के बाद मीरा कुमार का नाम हमारी पार्टी सुप्रीमों को पसंद है.

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