नोटबंदी: सात समस्याएं जो अब तक कायम हैं

आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद से ही लोगों को कई ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा था, वो अब तक बदस्तूर जारी हैं.


आइए डालते हैं एक नज़र ऐसी ही कुछ समस्याओं पर.
2000 का नोट- सरकार ने पुराने नोट बंद करने के बाद 2000 के नए नोट लाने की घोषणा की थी, जो नोटबंदी के फ़ैसले के साथ ही बाज़ार में आ तो गए. लेकिन इसे लेकर सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसे जल्दी कोई दुकानदार लेना नहीं चाह रहा है.
चूंकि 500 और 100 रुपये के नोट बाज़ार में पर्याप्त नहीं है इसलिए इसके छुट्टे लेने में लोगों को ख़ासी तक़लीफ़ हो रही है.
एटीएम के बाहर लंबी क़तार- नोटबंदी के बाद जो सबसे बड़ी समस्या लोगों के सामने आई है, वो है एटीएम के बाहर लगने वाली लंबी-लंबी कतारें.
एक-दो घंटे लाइन में खड़े हुए बिना पैसे निकालने के बारे में तो सोचा भी नहीं जा सकता है. इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं होने की वजह से ज्यादातर एटीएम खाली डिब्बे बने हुए हैं.
पैसा जमा करने की लाइन- बैंकों में पुराने नोट के रूप में कैश जमा करने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है.
पैसा निकालने की मुसीबत- बैंक से पैसा निकालने के लिए भी एटीएम की तरह ही लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है.
ख़राब नोट की समस्या- ख़राब नोटों को पहले वापस लेकर उनकी रिसाइक्लिंग की बात कही गई थी. लेकिन कैश के अभाव में उन्हें भी बैंकों की ओर से दिया जा रहा है. ऐसे नोटों को लेने से लोग और दुकानदार आनाकानी करते हैं.
नोटबदली का बंद होना- साढ़े चार हज़ार तक के नोट बदलने का फ़ैसला भी अब वापस ले लिया गया है. अब सिर्फ़ बैंक में पैसे जमा किए जा सकते हैं.
पेट्रोल पंप, टोल पर पुराने नोट बंद- पेट्रोल पंप पर पुराने नोट लेने की सुविधा दी गई थी, उसे अब दो दिसंबर से बंद करने की घोषणा हो चुकी है. इससे पहले पुराने नोटों को इस्तेमाल करने की समय सीमा 15 दिसंबर थी.
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