पत्रकार गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या

वरिष्ठ पत्रकार और दक्षिणपंथियों की आलोचक रही गौरी लंकेश की मंगलवार शाम बेंगलुरु में गोली मारकर हत्या कर दी गई है.
गौरी ने लंकेश पत्रिका के जरिए 'कम्युनल हार्मनी फोरम' को काफी बढ़ावा दिया. लंकेश पत्रिका को उनके पिता ने 40 साल पहले शुरू किया था और इन दिनों वो इसका संचालन कर रही थीं.
बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर सुनील कुमार ने बीबीसी को बताया, ''मंगलवार शाम गौरी जब अपने घर लौट रही थीं, तब उनके घर के बाहर ये हमला हुआ. ये हमला किस वजह से किया गया, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता.''
नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर पुलिस अधिकारियों ने बताया, ''गौरी जब राज राजेश्वरी नगर में अपने घर लौटकर दरवाज़ा खोल रही थीं, तब हमलावरों ने उनके सीने पर दो और सिर पर एक गोली मारी.''

बीजेपी सांसद से जुड़े मानहानि केस में दोषी

इससे पहले डॉ एमएम कलबुर्गी और डॉ पंसारे की भी हमलावरों ने हत्या की थी. 12वीं सदी के संत बश्वेश्वरा और रैशनजिल्म पर गौरी के विचार काफी हद तक कलबुर्गी जैसे ही थे.
डॉ कलबुर्गी की भी उनके घर के दरवाजे पर हत्या कर दी गई थी. गौरी को हाल ही में बीजेपी और सांसद प्रहलाद जोशी से जुड़े एक मानहानि केस में दोषी ठहराया गया था.
गौरी के पिता पी लंकेश एक पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर थे, जिन्होंने 1980 में लंकेश पत्रिका शुरू की थी. गौरी की उम्र 55 साल थी.
गौरी की परिवार में उनकी बहन कविता लंकेश, भाई इंद्रेश और मां हैं. कविता लंकेश राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता हैं.
गौरी की हत्या पर प्रतिक्रिया
दिल्ली के प्रेस क्लब में बुधवार दोपहर तीन बजे इस हत्या के विरोध में पत्रकार एकजुट हो रहे हैं.
बीबीसी हिंदी से बातचीत में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, ''ये बेहद दुखद खबर है. गौरी पत्रकार, लेखक और विकासशील विचारों की थीं. उन्होंने हमेशा कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी. ये बेहद दुखद है कि उनकी हत्या कर दी गई.
सिद्धारमैया ने कहा, ''मैंने पुलिस कमिश्नर से बात करके केस की जांच के लिए तीन टीमें बनाने और मुझे रिपोर्ट देने के लिए कहा है.''
सिद्धारमैया और गौरी के पिता पुराने दोस्त रहे थे.
कर्नाटक में कांग्रेस के प्रवक्ता ब्रजेश कलप्पा ने कहा, ''इस तरह से दाभोलकर और कलबुर्गी जैसे लोगों की हत्या की जाती है. ये सच है कि गौरी राइट विंग के खिलाफ थीं. पर वो एक ऐसी इंसान थीं, जिन्होंने वाकई कोशिश की थी कि इन लोगों को समझाया जा सके.''
इससे पहले, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ट्वीट कर कहा, ''जानी-मानी पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से हैरान हूं. इस जघन्य अपराध की निंदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. ये लोकतंत्र की हत्या है. गौरी शंकर की मौत से कर्नाटक ने एक विकासशील आवाज खोई है. मैंने एक दोस्त खोया है.''
गुजरात फाइल्स की लेखकर और पत्रकार राणा अय्यूब ने भी गौरी की हत्या पर दुख जताते हुए ट्वीट किया, ''मेरी किताब का कन्नड़ संस्करण छापने वाली मेरी दोस्त गौरी लंकेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई. देश के हर गली में एक गोड्से घूम रहा है. गौरी को लगभग हर संभावित दक्षिणपंथी संगठन से धमकी मिली थी. ''

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